मुगल काल / मुगल साम्राज्य

 

Mughal History (मुगल साम्राज्य का इतिहास ) – Mughal Samrajya की शुरुवात 1526 में हुयी, जिसने 18 शताब्दी के शुरुवात तक भारतीय उप महाद्वीप में राज्य किया था। जो 19 वी शताब्दी के मध्य तक लगभग समाप्त हो गया था। मुग़ल साम्राज्य तुर्क-मंगोल पीढी के तैनुर वंशी थे। मुग़ल साम्राज्य – Mughal Empire ने 1700 के आसपास अपनी ताकत को बढ़ाते हुए भारतीय महाद्वीपों के लगभग सभी भागो को अपने साम्राज्य के निचे कर लिया था।

तब तक उस समय इस साम्राज्य के निचे लगभग 12 करोड़ लोग थे। जिसका पहला बादशाह बाबर और अंतिम बादशाह बहादुर शाह द्वितीय था। तो आईये इन दोनों बादशाह के बिच का मुग़ल साम्राज्य का इतिहास – Mughal History जानते हैं।

मुगल वंश  एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जो 1526 में शुरू हुआ, जिसने 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ। मुग़ल सम्राट तुर्क-मंगोल पीढ़ी के तैमूरवंशी थे और इन्होंने अति परिष्कृत मिश्रित हिन्द-फारसी संस्कृति को विकसित किया। 1700 के आसपास, अपनी शक्ति की ऊँचाई पर, इसने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग को नियंत्रित किया – इसका विस्तार पूर्व में वर्तमान बंगलादेश से पश्चिम में बलूचिस्तानतक और उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कावेरी घाटी तक था। उस समय 40 लाख किमी² (15 लाख मील²) के क्षेत्र पर फैले इस साम्राज्य की जनसंख्या का अनुमान 11 और 13 करोड़ के बीच लगाया गया था। 1725 के बाद इसकी शक्ति में तेज़ी से गिरावट आई। उत्तराधिकार के कलह, कृषि संकट की वजह से स्थानीय विद्रोह, धार्मिक असहिष्णुता का उत्कर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद से कमजोर हुए साम्राज्य का अंतिम सम्राट बहादुर ज़फ़र शाह था, जिसका शासन दिल्ली शहर तक सीमित रह गया था। अंग्रेजों ने उसे कैद में रखा और 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद ब्रिटिश द्वारा म्यानमार निर्वासित कर दिया।

1556 में, जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जो महान अकबर के नाम से प्रसिद्ध हुआ, के पदग्रहण के साथ इस साम्राज्य का उत्कृष्ट काल शुरू हुआ और सम्राट औरंगज़ेब के निधन के साथ समाप्त हुआ, हालाँकि यह साम्राज्य और 150 साल तक चला। इस समय के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में एक उच्च केंद्रीकृत प्रशासन निर्मित किया गया था। मुग़लों के सभी महत्वपूर्ण स्मारक, उनके ज्यादातर दृश्य विरासत, इस अवधि के हैं।

 

 

 

 

1. बाबर– 1526 – 1530
बाबर भारत में मुगल वंश का संस्थापक था उसने पानीपत के प्रथम युद्ध में 1526 के दौरान लोधी वंश के साथ संघर्ष कर  लोदी राजवंश को ख़तम कर मुग़ल वंश स्थापित किया। जिसका पूरा नाम ज़हिर उद-दिन मुहम्मद बाबर था। बाबर का जन्म फ़रगना घाटी के अन्दीझ़ान नामक शहर में हुआ था। भारत में मुग़ल साम्राज्य की नीव बाबर ने ही रखी थी। जहां बाबर के पूर्वजों ने भारत में आकर लुट पाट, मार काट कर के चले गये वही बाबर भारत आकर यही के हो गये ।  बाबर ने 1530 तक शासन किया और उसके बाद उसका बेटा हुमायूं गद्दी पर बैठा। – आगे पढ़े: बाबर का इतिहास – Babar History

2. नसीरुद्दीन मोहम्मद हुमायूँ – 1530-1540
मुगल शासक हुमायूँ मुग़ल साम्राज्य के दुसरे बादशाह थे। जिन्होंने अपने पिता बाबर के बाद 1556 तक राज किया। हुमायूँ के मृत्यु तक मुग़ल साम्राज्य बहुत ज्यादा बढ़ गया था।

बाबर का सबसे बड़ा था जिसने अपने पिता के बाद राज्‍य संभाला और मुगल राजवंश का द्वितीय शासक बना। उसने लगभग 1 दशक तक भारत पर शासन किया किन्‍तु फिर उसे अफगानी शासक शेर शाह सूरी ने पराजित किया। हुमायूं अपनी पराजय के बाद लगभग 15 वर्ष तक भटकता रहा। इस बीच शेर शाह मौत हो गई और हुमायूं उसके उत्तरवर्ती सिकंदर सूरी को पराजित करने में सक्षम रहा तथा दोबारा हिन्‍दुस्‍तान का राज्‍य प्राप्‍त कर सका। जबकि इसके कुछ ही समय बाद केवल 48 वर्ष की उम्र में 1556 में उसकी मौत हो गई।

आगे पढ़े: हुमायूँ का इतिहास – Humayun History

3. शेर शाह सूरी – 1540-1545
शेर शाह सूरी सूरी साम्राज्य के संस्थापक था। जिसने मुग़ल साम्राज्य के एक छोटेसे सेनापति के रूप में काम किया था। और एक सैनिक के रूप में काम करते करते बढ़त पाकर सेनापति बन गया। जब मुग़ल शासक हुमायूँ किसी अभियान पर था तभी शेर शाह सूरी ने मुग़ल शासक के विरोध में जाकर बंगाल पर अपना कब्ज़ा जमाकर सूरी साम्राज्य की स्थापना की।

एक अफगान नेता था जिसने 1540 में हुमायूं को पराजित कर मुगल शासन पर विजय पाई। शेर शाह ने अधिक से अधिक 5 वर्ष तक दिल्‍ली के तख्‍त पर राज किया और वह इस उप महाद्वीप में अपने अधिकार क्षेत्र को स्‍थापित नहीं कर सका। एक राजा के तौर पर उसके खाते में अनेक उपलब्धियों का श्रेय जाता है। उसने एक दक्ष लोक प्रशासन की स्‍थापना की। उसने भूमि के माप के आधार पर राजस्‍व संग्रह की एक प्रणाली स्‍थापित की। उसके राज्‍य में आम आदमी को न्‍याय मिला। अनेक लोक कार्य उसके अल्‍प अवधि के शासन कार्य में कराए गए जैसे कि पेड़ लगाना, यात्रियों के लिए कुएं और सरायों का निर्माण कराया गया, सड़कें बनाई गई, उसी के शासन काल में दिल्‍ली से काबुल तक ग्रांड ट्रंक रोड बनाई गई। मुद्रा को बदल कर छोटी रकम के चांदी के सिक्‍के बनवाए गए, जिन्‍हें दाम कहते थे। यद्यपि शेर शाह तख्‍त पर बैठने के बाद अधिक समय जीवित नहीं रहा और 5 वर्ष के शासन काल बाद 1545 में उसकी मौत हो गई।

आगे पढ़े: शेर शाह सूरी का इतिहासSher Shah Suri History

4. इस्लाम शाह सूरी – 1545-1554
इस्लाम शाह सूरी ने अपने पिता शेर शाह सूरी के साम्राज्य को आगे बढाया। जिसे उसने 1545 से लेकर 1554 तक चलाया। लेकिन बादमें मुग़ल शासक हुमायूँ ने वापिस जीत लिया।

5. नसीरुद्दीन मोहम्मद हुमायूँ – 1555-1556
हुमायूँ ने 1555 में अपने हारे हुए साम्राज्य को ईरान साम्राज्य की मदत लेकर इस्लाम शाह सूरी को हराकर मुग़ल साम्राज्य को वापिस से प्रस्थापित किया। लेकिन उसके एक साल बाद 1556 में हुमायूँ की मृत्यु हो गयी।

6. जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर – 1556-1605
अकबर अपने पिता के मृत्यु के बाद 14 वर्ष की आयु में ही मुग़ल साम्राज्य के अगले शासक बने जो एक नए ढंग से मुग़ल साम्राज्य को चलाने के लिए जाने और माने जाते हैं। अकबर ने 1605 मृत्यु तक मुग़ल साम्राज्य पर राज किया।

हुमायूं के उत्तराधिकारी, अकबर का जन्‍म निर्वासन के दौरान हुआ था और वह केवल 13 वर्ष का था जब उसके पिता की मौत हो गई। अकबर को इतिहास में एक विशिष्‍ट स्‍थान प्राप्‍त है। वह एक मात्र ऐसा शासक था जिसमें मुगल साम्राज्‍य की नींव का संपुष्‍ट बनाया। लगातार विजय पाने के बाद उसने भारत के अधिकांश भाग को अपने अधीन कर लिया। जो हिस्‍से उसके शासन में शामिल नहीं थे उन्‍हें सहायक भाग घोषित किया गया। उसने राजपूतों के प्रति भी उदारवादी नीति अपनाई और इस प्रकार उनसे खतरे को कम किया। अकबर न केवल एक महान विजेता था बल्कि वह एक सक्षम संगठनकर्ता एवं एक महान प्रशासक भी था। उसने ऐसा संस्‍थानों की स्‍थापना की जो एक प्रशासनिक प्रणाली की नींव सिद्ध हुए, जिन्‍हें ब्रिटिश कालीन भारत में भी प्रचालित किया गया था। अकबर के शासन काल में गैर मुस्लिमों के प्रति उसकी उदारवादी नीतियों, उसके धार्मिक नवाचार, भूमि राजस्‍व प्रणाली और उसकी प्रसिद्ध मनसबदारी प्रथा के कारण उसकी स्थिति भिन्‍न है। अकबर की मनसबदारी प्रथा मुगल सैन्‍य संगठन और नागरिक प्रशासन का आधार बनी।

अकबर की मृत्‍यु उसके तख्‍त पर आरोहण के लगभग 50 साल बाद 1605 में हुई और उसे सिकंदरा में आगरा के बाहर दफनाया गया। तब उसके बेटे जहांगीर ने तख्‍त को संभाला।

आगे पढ़े: जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का इतिहासAkbar History

7. नुरुद्दीन मोहम्मद जहाँगीर – 1605-1627
अपने पिता अकबर के मृत्यु के बाद जहाँगीर ने सत्ता संभाली। जहाँगीर ने 1605 से अपनी मृत्यु 1627 तक मुग़ल साम्राज्य पर राज्य किया।

अकबर के स्‍थान पर उसके बेटे सलीम ने तख्‍तोताज़ को संभाला, जिसने जहांगीर की उपाधि पाई, जिसका अर्थ होता है दुनिया का विजेता। उसने मेहर उन निसा से निकाह किया, जिसे उसने नूरजहां (दुनिया की रोशनी) का खिताब दिया। वह उसे बेताहाशा प्रेम करता था और उसने प्रशासन की पूरी बागडोर नूरजहां को सौंप दी। उसने कांगड़ा और किश्‍वर के अतिरिक्‍त अपने राज्‍य का विस्‍तार किया तथा मुगल साम्राज्‍य में बंगाल को भी शामिल कर दिया। जहांगीर के अंदर अपने पिता अकबर जैसी राजनैतिक उद्यमशीलता की कमी थी। किन्‍तु वह एक ईमानदार और सहनशील शासक था। उसने समाज में सुधार करने का प्रयास किया और वह हिन्‍दुओं, ईसाइयों तथा ज्‍यूस के प्रति उदार था। जबकि सिक्‍खों के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण थे और दस सिक्‍ख गुरूओं में से पांचवें गुरू अर्जुन देव को जहांगीर के आदेश पर मौत के घाट उतार दिया गया था, जिन पर जहांगीर के बगावती बेटे खुसरू की सहायता करने का अरोप था। जहांगीर के शासन काल में कला, साहित्‍य और वास्‍तुकला फली फूली और श्री नगर में बनाया गया मुगल गार्डन उसकी कलात्‍मक अभिरुचि का एक स्‍थायी प्रमाण है। उसकी मृत्‍यु 1627 में हुई।

आगे पढ़े: जहाँगीर का इतिहास – Jahangir History

8. शहाबुद्दीन मोहम्मद शाहजहाँ – 1627-1658
शाहजहाँ अपनी पिता जहाँगीर के मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य के बादशाह बने जो मुग़ल साम्राज्य के सबसे बड़े लोकप्रिय और चर्चित रहने वाले बादशाह थे, जो खास तौर पर अपनी बेग़म मुमताज महल के लिए दुनिया का सबसे खुबसूरत ताजमहल बनाने के लिए याद किए जाये हैं।

जहांगीर के बाद उसके द्वितीय पुत्र खुर्रम ने 1628 में तख्‍त संभाला। खुर्रम ने शाहजहां का नाम ग्रह किया जिसका अर्थ होता है दुनिया का राजा। उसने उत्तर दिशा में कंधार तक अपना राज्‍य विस्‍तारित किया और दक्षिण भारत का अधिकांश हिस्‍सा जीत लिया। मुगल शासन शाहजहां के कार्यकाल में अपने सर्वोच्‍च बिन्‍दु पर था। ऐसा अतुलनीय समृद्धि और शांति के लगभग 100 वर्षों तक हुआ। इसके परिणाम स्‍वरूप इस अवधि में दुनिया को मुगल शासन की कलाओं और संस्‍कृति के अनोखे विकास को देखने का अवसर मिला। शाहजहां को वास्‍तुकार राजा कहा जाता है। लाल किला और जामा मस्जिद, दिल्‍ली में स्थित ये दोनों इमारतें सिविल अभियांत्रिकी तथा कला की उपलब्धि के रूप में खड़ी हैं। इन सब के अलावा शाहजहां को आज ताज महल, के लिए याद किया जाता है, जो उसने आगरा में यमुना नदी के किनारे अपनी प्रिय पत्‍नी मुमताज महल के लिए सफेद संगमरमर से बनवाया था।
आगे पढ़े: शाहजहाँ का इतिहासShahJahan History

9. मोइनुद्दीन मोहम्मद औरंगजेब आलमगीर – 1658-1707
औरंगजेब मुगल साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली और धनि बादशाह थे। जिनके कार्यकाल में मुगल साम्राज्य ने सबसे ज्यादा विस्तार किया। अपने जीवनकाल में औरंगजेब ने लाल किले में मोती मज्जिद, लाहोर की बादशाही मज्जिद, और बीबी का मकबरा जैसे निर्माण कियें।

औंरगज़ेब ने 1658 में तख्‍त संभाला और 1707 तक राज्‍य किया। इस प्रकार औरंगज़ेब ने 50 वर्ष तक राज्‍य किया। जो अकबर के बराबर लम्‍बा कार्यकाल था। परन्‍तु दुर्भाग्‍य से उसने अपने पांचों बेटों को शाही दरबार से दूर रखा और इसका नतीजा यह हुआ कि उनमें से किसी को भी सरकार चलाने की कला का प्रशिक्षण नहीं मिला। इससे मुगलों को आगे चल कर हानि उठानी पड़ी। अपने 50 वर्ष के शासन काल में औरंगजेब ने इस पूरे उप महाद्वीप को एक साथ एक शासन लाने की आकांक्षा को पूरा करने का प्रयास किया। यह उसी के कार्यकाल में हुआ जब मुगल शासन अपने क्षेत्र में सर्वोच्‍च बिन्‍दु तक पहुंचा। उसने वर्षों तक कठिन परिश्रम किया किन्‍तु अंत में उसका स्‍वास्‍थ्‍य बिगड़ता चला गया। उसने 1707 में 90 वर्ष की आयु पर मृत्‍यु के समय कोई संपत्ति नहीं छोड़ी। उसकी मौत के साथ विघटनकारी ताकतें उठ खड़ी हुईं और शक्तिशाली मुगल साम्राज्‍य का पतन शुरू हो गया।
आगे पढ़े: औरंगजेब का इतिहासAurangzeb History

Mughal Empire

10. बहादुरशाह जफर I उर्फ शाह आलम I – 1707-1712
बहादुरशाह जफर I उर्फ शाह आलम I मुग़ल साम्राज्य पर 1707 से लेकर 1712 तक पांच साल राज्य किया।

11. जहान्दर शाह – 1712-1713
जहान्दर शाह बहुत छोटी सी अवधी के लिए मुग़ल साम्राज्य के शासक बने। जिन्होंने 1712 से 1713 तक एक साल मुग़ल साम्राज्य पर राज्य किया।

12. फुर्रूखसियर – 1713-1719
फुर्रूखसियर का जन्म 20 अगस्त 1685 में हुआ। वे 1713 से लेकर 1719 तक मुग़ल साम्राज्य के शासक बने।

13. रफी उल-दर्जात – 1719
रफी उल-दर्जात छोटीसी अवधी के लिए मुग़ल साम्राज्य के शासक बने।

14. रफी उद-दौलत उर्फ शाहजहाँ II – 1719
रफी उद-दौलत उर्फ शाहजहाँ II बहुत कम समय मुग़ल साम्राज्य के शासक बनकर बिताया।

15. निकुसियर – 1719
निकुसियर बहुत छोटी सी अवधी के लिए मुग़ल साम्राज्य के शासक बने।

16. मोहम्मद इब्राहिम – 1720
मोहम्मद इब्राहिम छोटीसी अवधी के लिए मुग़ल साम्राज्य के शासक बने।

17. मोहम्मद शाह – 1719-1720, 1720-1748 
मुहम्मद शाह मुगल सम्राट था, जिन्हें रोशन अख्तर भी कहते थे। उनकी मृत्यु 1748 में हुयी और वो उनकी मृत्यु तक मुग़ल शासक बने रहे।

18. अहमद शाह बहादुर – 1748-54
अहमद शाह बहादुर अपने पिता के बाद 15 वर्ष की उम्र में मुग़ल शासक बने।

19. आलमगीर II – 1754-1759
आलमगीर II 1754 से लेकर 1759 तक मुग़ल साम्राज्य के शासक बने वे बादशाह जहांदार शाह के पुत्र थे।

20. शाहजहाँ III – 1759
शाहजहाँ III औरंगज़ेब का कनिष्ठ पुत्र थे। जिनका कार्यकाल बहुत काम अवधी का रहा।

21. शाह आलम II – 1759-1806, 1806-1837
शाह आलम II को मुग़ल साम्राज्य की गद्दी अपने पिता, आलमगीर II से मिली।

22. बहादुर ज़फ़र शाह II – 1837-1857
बहादुर ज़फ़र शाह II मुग़ल साम्राज्य के आखिरी बादशाह थे। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रजो के खिलाफ़ लढ़े जिसमे उन्हें हार प्राप्त हुयी। हार के बाद अंग्रजों ने उन्हें अभी के म्यांमार में भेज दिया जह वो उनके मृत्यु तक रहे। और इस तरह उनके मृत्यु के साथ मुग़ल साम्राज्य का अंत हो गया।

मुगल साम्राज्य से सम्बंधित प्रश्न

  • अकबर के शासनकाल मे अमलगुजार नामक अधिकारीका कार्य था- भूमि राजस्‍व का मूल्‍यांकन और संग्रह करना 
  • कौन सा मकबरा ‘व्दितीय ताजमहल’ कहलाता है- राबिया-उद्-दौरानी का मकबरा/बीबी का मकबरा 
  • हुमायुं द्वारा लडे गये प्रमुख युध्‍दों का सही क्रम है- चौसा, कन्‍नौज/बिलग्राम, सरहिन्‍द 
  • औरंगजेब ने दक्षिण में जिन दो राज्‍यो को विजीत किया था-वे थे- बीजापुर व गोलकुण्‍डा 
  • जहांगीर की आत्‍मकथा तुजुक-ए-जहांगीरी किसने पूरी की- जगत गोसाई ने 

 

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